राम मंदिर धर्मध्वजा,हिंदुत्व की नव भोर
कुमार महेंद्रपच्चीस नवंबर दो हजार पच्चीस,
पुनीत पावन अनुपम बेला ।
राम मंदिर निर्माण पूर्णता पल,
रोम रोम हर्ष उल्लास नवेला ।
जन मानस अति आह्लादित,
देख स्वप्न पटल यथार्थ छोर ।
राम मंदिर धर्मध्वजा,हिंदुत्व की नव भोर ।।
कलयुग अंतर त्रेता अनुभूति,
सर्वत्र गूंजित जय श्री राम उद्घोष ।
मर्यादा परंपरा संस्कार झलक,
मुख मंडल रघुनंदन परितोष ।
निहार भगवा रंगी दिव्य पताका,
परिवेश सनातन गौरव सराबोर ।
राम मंदिर धर्मध्वजा,हिंदुत्व की नव भोर ।।
सुफलित त्याग तपस्या कामना,
चिरप्रतीक्षित कल्पना साकार ।
पुलकित प्रफुल्लित जन हृदय,
प्रशस्त सुख समृद्धि आधार ।
राघव आदर्श शिखर विराजित,
उत्साह उमंग उल्लास चारों ओर ।
राम मंदिर धर्मध्वजा,हिंदुत्व की नव भोर ।।
इतिहास अंतर स्वर्णिम पृष्ठ,
हिंदू अभ्युदय पथ प्रशस्त ।
अंतःकरण स्नेह प्रेम उदय,
संकीर्ण सोच धारणा अस्त ।
संकल्प सिद्धि विकसित राष्ट्र,
समग्र खुशहाली प्रयास पुरजोर ।
राम मंदिर धर्म ध्वजा, हिंदुत्व की नव भोर ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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