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रंग रूप और गुण

रंग रूप और गुण

तन काला है तो क्या हुआ, 
दिल काला न होना चाहिए। 
रूप सामान्य से क्या हुआ, 
शरीर गुणवान होना चाहिए।। 
शरीर चाहे जितना भी चिकना हो, 
एक दिन झुर्रियाँ पड़ जायेंगी। 
शरीर के लिए मोह आसक्ति, 
उस दिन स्वयं ही मिट जायेंगी।। 
शारीरिक प्रेम क्षणिक है, 
दिल और गुण से प्रेम स्थायी है। 
गुणयुक्त शरीर खो जाने पर, 
इस जग में नहीं भरपाई है। 
दिल से दिल अगर जुड़ा है तो, 
वह अंत तलक जायेगा। 
शरीर भले जलकर छाई बन जाये, 
 उसकी याद दिल में बसा रह जायेगा।। 

          जय प्रकाश कुवंर

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