शास्त्र के साथ शस्त्र,

शास्त्र के साथ शस्त्र,

शान्ति के लिये अस्त्र,
जब जब भी त्यागा
दानवता से मानव त्रस्त।


जब जब सच बिसराया,
समय ने धोखा खाया।
झूठ बेल परवान चढ़ी,
धर्म औंधे मुँह आया।


मानव को मानवता समझाइए,
दानव को दानवता से मिटाईये।
धर्म अध्यात्म सज्जनो के लिये,
दुर्जनों से भाई चारा न निभाईये।


लक्ष्य जिसका इस्लामिक राष्ट्र बनाने का,
इस्लाम का परचम दुनिया मे फहराने का।
वेद पुराण शास्त्रों का सार उसे न बताईये,
जिसने थामा दामन, ज्ञान दीप बुझाने का।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
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