तुम कहते यह घर तेरा है।
मैं कहता यह घर मेरा है।।ना तेरा है, ना यह मेरा है।
यह चिड़िया रैन बसेरा है।।
तुम पंछी बन कर आये हो।
एक खोंता यहाँ बनाये हो।।
जिस दिन पंछी उड़ जाएगा।
खोंता सुना रह जाएगा।।
श्रृष्टि कर्ता ने ठौर दिया।।
पालन कर्ता ने और दिया।।
माया ने ऐसा ज्ञान दिया।
तुमने सब अपना मान लिया।।
यही हम सब की नादानी है।
सब छोड़ यही पर जानी है।।
घर श्रृष्टि कर्ता के हाथ रहेगा।
तेरा मेरा केवल इतिहास कहेगा।।
धरती आकाश सब उसका है।
इसे पैदा करना किसके बस का है।।
जिस दिन मनुष्य यह समझ जाएगा।
तेरा मेरा का झंझट मिट जाएगा।।
फिर ना कोई लड़ाई होगी।
इंच इंच के लिए ना कोई भिड़ाई होगी।।
दुश्मनी का नाम मिट जाएगा।
सबके साथ सबकी मिताई होगी।।
जय प्रकाश कुवंर
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