श्वाँस की यात्रा जहाँ रुक जाएगी
डॉ रामकृष्ण मिश्र
श्वाँस की यात्रा जहाँ रुक जाएगी
वहीं से होगा शुरू अभियान फिर। ।
अभी तो संवाद के जाग्रत मसौदे
कुलबुलाते भाव के कच्चे घरौंदे
चुनौती देते हुए से खिल खिलाते
अचानक उगता हुआ संज्ञान फिर।।
समय जीवन केलिए है बहुत थोड़ा
इस जगत से अभी तक जितना निचोड़ा।
क्या वही पर्याप्त होगा लक्ष्र्य तक भी
या कि हो संचेतना -आधान फिर।।
स्थूल से उठ सूक्ष्म तक जाना कठिन है
श्वेत संकल्पित मनोवल यदि मलिन है।
पतन की गति में कहाँ विश्राम होगा
आ न जाए कहीं से व्यवधान फिर।। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
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