हम के देख के भागे लू।

हम के देख के भागे लू।

कुछ हमार तू लागे लू।।
अब जब हम ए घर में आईं।
दिखे ना तोहर परछाईं।।
अब तो बचपन बीत ग‌इल बा।
यौवन तन पर खिल ग‌इल बा।।
कुछ दिन में पिया घर ज‌इबू।
संग पिया के रास रच‌इबू।।
जीजा दीदी याद ना अइहें।
घर सुना होकर रह ज‌इहें।।
लड़की धन पराया हो ले।
केहू छाती पीट के रो ले।।
बाकिर रिश्ता बनल रहेला।
दुनिया इ अइसहीं चलेला।।
 जय प्रकाश कुवंर
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