नपुंसक हिंदू

नपुंसक हिंदू

ऋचा श्रावणी
न तो इस देश को मुसलमानो से खतरा हैं
न खतरा हैं ईसाई से
यह राष्ट्र डूब गया हैं नपुंसक हिंदुओं से
जिन्होंने हाथों में मेहंदी रचाई हैं


मंदिर टूटा, मस्जिद बना
किसी को कोई फर्क न परा
क्या मराठा, क्या प्रताप
क्या रानी दुर्गावती
क्या रानी वेलु नचियार
सबको अब घूंघट दे दो
डाल दिए हैं सब हथियार


भरी सभा में चीर हरण
नहीं लेता कोई कृष्ण अवतार
साधुओं की निर्मम हत्या
नहीं उठाते कोई आवाज़


देख तमाशा कुछ नहीं करते
फासी दो उनको सबसे पहले
बाद में पकड़ो उन कातिलों को
जो हमें मारने का संकल्प लिए


राष्ट्र कभी नहीं मरता
जब हर नागरिक राष्ट्रवादी हो
यह दम तभी तोड़ता
जब इसके साथ गद्दारी हो।
स्वरचित ऋचा श्रावणी
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