तम्बाकू

तम्बाकू

धूम्रपान निषेध दिवस
(समस्त देशवासियों से विनम्र अनुरोध है लोक माता अहिल्याबाई होलकर की जन्म जयंती पर भारत को धूम्रपान मुक्त करने के प्रयासों में सहायक बन कर अपने श्रद्धा सुमन समर्पित करें)
करो स्वयं का ही सम्मान ,
छोड़े रहो सदा ही धूम्रपान


तम्बाकू गुटखा खैनी,
हैं नहीं किसी की बहिनी

सदा बढ़ायें जीवन में हैरानी ,
रहती है दिन रात बेचैनी बौरानी

खुद ही बन जाते हो पीकदानी ,
चेहरे पर लाते हो वीरानी

यह बात सभी ने जानी ,
पर अब तक नहीं किसी ने मानी

धूम्रपान को क्यों बनाते अपनी शान

मांग मांग कर खाते हो


- रखते न कोई आन बान

करो स्वयं का ही सम्मान ,
छोड़े रहो सदा ही धूम्रपान

बीड़ी सिगरेट हुक्का पीना ,
मानो रक्त है अपना पीना

ऐसे जीना भी क्या जीना ,
जिस से स्वयं का शरीर होता है झीना

बनाओ ख़ुद की उत्तम पहचान ,
बढ़ाओ समाज और देश की शान

करो स्वयं का ही सम्मान ,
‌ ‌ छोड़े रहो सदा ही धूम्रपान

बीड़ी सिगरेट और तम्बाकू की -
- है ऐसी जात

- सबके फेफड़े और लीवर खा जात

किडनी गुर्दे सब ख़राब हो जात

फिर भी बच्चे बूढ़े सभी ज़हर चबात

रखते नहीं किसी का मान ,
मान न मान मैं तेरा मेहमान

करो स्वयं का ही सम्मान ,
छोड़े रहो सदा ही धूम्रपान

जय भारत वन्दे मातरम्

चंद्र प्रकाश गुप्त "चंद्र"
(ओज कवि एवं राष्ट्रवादी चिंतक) अहमदाबाद, गुजरात
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