"करवा चौथ"

"करवा चौथ"

आता करवा चौथ का त्यौहार,
संग लाता है खुशहाली अपार,
साल भर करती सभी सुहागिनें 
इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार ।

सजना संवरना सोलह सिंगार,
पिया मिलन को हो के बेकरार,
भले हो जाती भूख से व्याकुल 
फिर भी करती सिर्फ फलाहार।

सुहागिनों को इससे विशेष प्यार,
सबसे अनूठा इनका त्यौहार,
रात को करके पूजा चंद्रमा की
पति को नज़रों से करती प्यार।

संग मिलकर दोनों लेते आहार, 
इसी से बढ़ता उनके  बीच प्यार
यही होती परिणीता की कामना 
खुशियों से भरा रहे उसका संसार।

स्वरचित एवं मौलिक रचना 
सुमित मानधना 'गौरव'
सूरत गुजरात।
करवा चौथ की सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
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