राजनीति के जादूगर हैं गहलोत
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सचमुच ही सियासत के जादूगर हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में अपने प्रतिद्वन्द्वी सचिन पायलट को संतुष्ट करते हुए उन्हांेने आधा दर्जन अपने सहायक नियुक्त किये हैं। इनमंे वे निर्दलीय विधायक हैं जिन्होंने राजनीतिक संकट के समय गहलोत का साथ दिया था। इन 13 निर्दलीय विधायकों मंे कई को मंत्रिमंडल मंे जगह मिलने की उम्मीद थी लेकिन सचिन पायलट के समर्थकों और बसपा छोड़कर आये विधायकों को ही मंत्रिमंडल मंे जगह दी गयी। अब अशोक गहलोत ने सभी को संतुष्ट कर दिया है। निर्दलीय विधायकों को सलाहकार बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दे दी और किसी को असंतोष नहीं रहा है।
गहलोत मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद अब मंत्री बनने से वंचित रह गये विधायकों को राजनीतिक नियुक्तियां देने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इसके तहत मंत्रिमंडल विस्तार के तत्काल बाद छह विधायकों को सीएम अशोक गहलोत का सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है। इसमें सरकार समर्थित निर्दलीय विधायकों को पूरी तरजीह दी गई है। छह में से तीन सलाहकार निर्दलीय विधायकों को बनाया गया है। कैबिनेट और राज्यमंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।
सीएम अशोक गहलोत के सलाहकार बनाये गये 6 विधायकों में खेतड़ी विधायक डॉ जितेंद्र सिंह, नवलगढ़ विधायक डॉ। राजकुमार शर्मा, सवाई माधोपुर विधायक दानिश अबरार समेत निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा, बाबूलाल नागर और रामकेश मीणा शामिल हैं। संयम लोढ़ा सिरोही से विधायक हैं। वहीं बाबूलाल नागर दूदू से और रामकेश मीणा गंगापुर सिटी से विधायक हैं। सीएम अशोक गहलोत ने हाल ही में फिर बयान दिया था कि संकट के समय जिन लोगों ने 34 दिन हमारे साथ होटल में गुजारे थे हम उन्हें भूल कैसे सकते हैं? खेतड़ी विधायक डॉ. जितेंद्र सिंह 5 बार के विधायक हैं। वे पूर्व में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। डॉ. राजकुमार शर्मा तीन बार से विधायक हैं। वे पिछली गहलोत सरकार में चिकित्सा राज्यमंत्री थे। दानिश अबरार पहली बार विधायक बने हैं। वे कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे स्व. अबरार अहमद के पुत्र हैं। वहीं सिरोही के निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा तीन बार से विधायक हैं। संयम लोढ़ा की पहचान तेज-तर्रार विधायक के तौर पर है। वे अक्सर सीएम के साथ देखे जाते हैं। रामकेश मीणा गंगापुर सिटी से 2 बार के विधायक हैं। वे पूर्व में संसदीय सचिव रह चुके हैं। दूदू विधायक बाबूलाल नागर 4 बार के विधायक हैं। वे भी पूर्व में राज्यमंत्री रह चुके हैं। सलाहकार बनाये गये विधायकों में से डॉ. जितेंद्र सिंह और डॉ. राजकुमार शर्मा झुंझुनू जिले से हैं। दानिश अबरार और रामकेश मीणा सवाई माधोपुर जिले से हैं। संयम लोढ़ा सिरोही और बाबूलाल नागर जयपुर जिले से हैं। सवाई माधोपुर जिले का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं है। अब इस जिले से 2 विधायकों को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया है। सिरोही जिले से भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं है लेकिन अब वहां से संयम लोढ़ा की सलाहकार के तौर पर नियुक्ति की गई है। झुंझुनूं जिले से अब तक मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं था। अब वहां बृजेंद्र सिंह ओला और राजेंद्र गुढ़ा राज्यमंत्री हैं। वहीं डॉ. जितेंद्र सिंह और डॉ. राजकुमार शर्मा अब मुख्यमंत्री के सलाहकार बन गये हैं। इन विधायकों को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। सलाहकार के रूप में इन विधायकों की बड़ी भूमिका रहेगी।
ध्यान रहे लंबी जद्दोजहद के बाद गहलोत मंत्रिमंडल का 21 नवम्बर को विस्तार हुआ। इसके तहत जहां 12 नये मंत्री बनाये गये वहीं तीन मौजूदा राज्यमंत्रियों को कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रमोट किया गया। नये मंत्रियों में पांच सचिन पायलट गुट के हैं। कुल 15 मंत्री बनाए। इनमें 11 कैबिनेट और चार राज्यमंत्री हैं। कैबिनेट के रूप में शपथ लेने वालें मंत्रियों में हेमाराम चैधरी, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, रामलाल जाट, डॉ. महेश जोशी, विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा, ममता भूपेश बैरवा, भजन लाल जाटव, टीकाराम जूली, गोविंद राम मेघवाल और शकुंतला रावत शामिल हैं। वहीं राज्यमंत्री के तौर पर जाहिदा खान, बृजेंद्र सिंह ओला, राजेंद्र सिंह गुढा और मुरारीलाल मीणा शामिल हैं। पहले से राज्यमंत्री टीकाराम जूली, ममता भूपेश बैरवा व भजन लाल जाटव को कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रमोट किया जा रहा है। गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार में पायलट खेमे के 5 विधायकों को जगह मिली है। इनमें तीन विधायक कैबिनेट और 2 राज्यमंत्री बने। पायलट खेमे के हेमाराम चैधरी, विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। सियासी संकट में विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। अब अब फिर से दोनों की मंत्रिमंडल में एंट्री हुई। वहीं बृजेंद्र सिंह ओला और मुरारी लाल मीणा को राज्यमंत्री के तौर पर जगह मिली है। अभी मंत्रिमंडल में कुल 12 मंत्रियों के पद खाली हैं। मौजूदा मंत्रिमंडल में से तीन राज्यमंत्री प्रमोट हुए होंगे। इसके साथ ही मंत्रिमंडल का 30 का कोटा पूरा हो जाएगा। पूर्व में सरकार और संगठन में दोहरी जिम्मेदारी निभाने वाले हरीश चैधरी, गोविंद सिंह डोटासरा और डॉ. रघु शर्मा के अलावा मौजूदा मंत्रिमंडल में से कोई भी मंत्री ड्रॉप नहीं होगा।नए मंत्रिमंडल में 11 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। लेकिन जो विधायक मंत्री बनने से वंचित रहे, उनमें थोड़ी मायूसी भी देखी गई। इसीलिए छह विधायकों को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया। इन्हें मंत्री का दर्जा मिलेगा। इनमें तीन निर्दलीय और तीन कांग्रेस विधायक शामिल हैं। नए मंत्रिमंडल में कई जिलों को अभी भी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। धौलपुर, नागौर और सीकर ऐसे ही जिले हैं जहां से किसी भी कांग्रेस विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। वहीं भरतपुर को मंत्रिमंडल पुनर्गठन में सबसे बड़ी सौगात मिली है। भरतपुर जिले से 4 मंत्री बनाए गए हैं जिनमें वैर विधानसभा से भजनलाल जाटव को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्र सिंह को भी कैबिनेट मंत्री मंडल में शामिल किया गया है। दूसरी तरफ मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए सरकार ने कांमा से विधायक जाहिदा खान को भी राज्यमंत्री बनाया है। भरतपुर से विधायक डॉक्टर सुभाष गर्ग भी मंत्रिमंडल में शामिल हैं। भरतपुर को चार मंत्री मिलने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में खुशी का ठिकाना ना रहा और एकदूसरे को मिठाई खिलाकर आलाकमान और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को धन्यवाद दिया। ढोल-नगाड़ों के साथ उन्होंने इस खुशी को जाहिर किया। (हिफी)
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