मानवता का पतन मानवता वादियों के लिए गंभीर चुनौती------- डॉक्टर विवेकानंद मिश्रा
गया स्थानीय कालीबाड़ी के प्रांगण में विश्व मानवतावादी दिवस का आयोजन भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा द्वारा अभासीय बैठक आयोजित कर संपन्न हुई। बैठक का शुभारंभ महासभा के संरक्षक प्रदेश के वरिष्ठ कवि साहित्यकार आचार्य राधा मोहन मिश्र माधव ने किया। उन्होंने कहा समाज संचालन का दायित्व बुद्धिजीवियों पर है किंतु दुर्भाग्य है कि बुद्धिजीवी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं। जिसके फलस्वरूप मानवता का ऐसा घोर पतन मानवता वादियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।यहां आने वाली पीढ़ियों के लिए शुभ संकेत नहीं है। मंत्रालय आचार्य पंडित रामचार्य जी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में जिस तेजी के साथ समस्त भूमंडल में मानवता का लोप हो रहा है यह चिंता का विषय है ।उन्होंने इसके लिए वर्तमान आधुनिक शिक्षा प्रणाली को दोषपूर्ण बताया
मगध विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष हिंदी जगत के जाने-माने हस्ताक्षर प्रोफेसर उमेश चंद्र मिश्र शिव ने कहा कि मानवता सद्गुण का मूल रूप है, जिसमें सत्य प्रेम करुणा दया निहित है। जिसका आज सर्वथा अभाव दृष्टिगोचर हो रहा है। चिंतनीय है।
पंडित बालमुकुंद मिश्रा ने मानवता मानव का सबसे बड़ा धर्म है
आचार्य पंडित कमलेश पूण्यार्क गुरु जी ने इसके लिए संपूर्ण व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार अत्याचार पर अंकुश ना लगाने को सबसे बड़ा दोष बताया।
पंडित अनंत मराठे ने कहा कि आज मानवता वादियों का दायित्व पहले से अधिक बढ़ा है। पूरे विश्व में मानव समुदाय पर दानवता का ऐसा नंगा नाच चिंता का विषय है।
नयनतारा ने कहा कि मानवतावादी दृष्टिकोण कमजोर पढ़ने से समस्त राष्ट्र को खतरा उत्पन्न हो गया है। इससे निपटने की विश्वव्यापी व्यवहारिक योजना बननी चाहिए ।
आज की अभासीय बैठक में जिन प्रमुख व्यक्तियों ने विचार व्यक्त किए उनमें पूर्व प्राचार्य डॉ रामेश्वर त्रिपाठी डॉ प्रताप नारायण मिश्र मनीष अपराजिता मिश्रा पंडित प्रणव कुमार मिश्र, डा. रविशंकर मिश्र "राकेश", राममोहन शुक्ल, तारा चक्रवर्ती प्रेरणा मराठे रंजना पांडे रेखा देवी अनिशा कटरियार वैष्णवी मांडवी गुर्दा रोहित पाठक टाटक धनंजय कुमार मिश्रा गणेश मिश्रा आशुतोष मिश्र हरि नारायण त्रिपाठी सत्येंद्र द्विवेदी मोहित पवन कुमार मिश्र प्रियंका उषा रीता पाठक डॉ परमेश्वर प्रसाद मिश्र डॉक्टर देवेंद्र पाठक डॉक्टर मंटू मिश्रा रंजीत पाठक कुमारी गुड़िया धीरेंद्र उपाध्याय रीना गिरी आदि प्रमुख थे।
अभासीय बैठक की अध्यक्षता विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर विवेकानंद मिश्रा ने किया। उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों की रक्षा मानव, मानवतावादियों के लिए युगधर्म बताया। उन्होंने लोक कल्याण की इच्छा से ईमानदारी पूर्वक प्रतिबद्ध होने, समाज के जागरूक बुद्धिजीवियों मानवता वादियों से एकजुट होने की अपील की।
धन्यवाद ज्ञापित प्रसिद्ध समाजसेवी विदुषी ललिता चक्रवर्ती ने किया।
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