ईसका क्या उत्तर है?
--:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र "अणु"
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मजहबी तालीम का ये कैसा असर है।
जो तालिबानियों के हाथ में खंजर है।1।
देखो आदमी है आदमी के खून का प्यासा-
उनकी सरजमीं हीं नहीं दिल भी बंजर है।2।
अमनचैन की दुआ तो बददुआ लगता है-
इसीलिए तो हाल उनका आज बदतर है।3।
उनकी बातों पर अब ऐतवार नही रहा-
इन आदमियों से अच्छा असभ्य वनचर है।4।
कुछ लोगों ने मजहब को अफीम कहा था-
पर "मिश्र अणु" जाना ये मीठ्ठा जहर है।।
जो अपनों की बहन-बेटियों को बेच रहे-
बडे बादशाह ने जो छोडा दिया शहर है।।
ऐ कैसा भाईचारा है जो भाई को मारा है-
उन शांतिदूतों के पास ईसका क्या उत्तर है?5।
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