एक जुनून दिल के अंदर
एक जुनून दिल के अंदर,
कोई रोके रोक न पायेगा
धरातल छोटा पड़ जायेगा
सुख जायेंगे सभी समंदर
ओझल हो न स्मृति पटल से
चलता रहा कुंठा का खंजर।
एक जुनून दिल के अंदर .......... ।।
जब कभी करोगी प्रीत मुझसे
नैनों के अंदर समा जाना
दिल में उठे अगाध प्रेम के लहरों में
मन भर डुबकी लगा जाना
स्मृतियाँ शेष तब रह जायेगी
मत चलाना नफरत का खंजर।
एक जुनून दिल के अंदर........... ।।
तेरी सूरत ओझल होता नहीं,
है कभी मेरे दोनों नयनों से,
तेरी मूरत घर बना लिया है
मन मंदिर के अंदर वर्षों से
ऋणी हूं परम पिता परमात्मा का
जो हमें तुमसे अनायास ही मिलाया
तन्हा रहता हूँ है बेचैनी का मंजर।
एक जुनून दिल के अंदर.............।।
ऋणी हूँ उस पल का मैं
शांत मन में प्रेम का दीपक जलाया
प्रेम परिणय को समझ न पाया
एक झटके में उद्वलित कर डाला
चाहत की तृष्णा को शांत करूँ कैसे
जिसमे चाहत की शैलब को है पाया
घुट घुट कर जीता हूँ बेचैनी है अंदर।
एक जुनून दिल के अंदर..............।।
उम्मीद की उठी बलबती किरणें
मन के अंदर करती क्रूर क्रंदन
हृदय पटल पर पड़े अमिट रेखा
स्मृतियों की करती अभिनंदन
मानो सारे सुख गये फुलबगिया
लहलहाती धरती हो गई है बंजर।
एक जुनून दिल के अंदर..............।।
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