गौरैया
फुदक-फुदक आती गौरैया ।
नन्हीं-मुन्नी , प्यारी-प्यारी
सब अंगों से लगती न्यारी ।
चीं-चीं , चूँ-चूँ बोल-बोल कर
दिल बहलाती है गौरैया ।
लगती जैसे मैया-भैया ।
चावल के दाने चुगती है
डुबक-डुबक पानी पीती है।
गाढ़े-भूरे , कुछ सफेद-सी
मन को भाती है गौरैया ।
दे दो दाने , नहीं रुपैया ।
तिनके ढूँढ़े गली-गली
ढोकर लाती भली-भली ।
उन्हें सजा करके गवाक्ष में
नीड़ बनाती है गौरैया ।
अंडे-बच्चे होंगे दैया ।
चिड़ा-चिड़ी दोनों गौरैया
कोमल प्राणी है गौरैया ।
तन-मन की सुंदर गौरैया
सबके मन भाती गौरैया ।
दे दो शरण रहे गौरैया ।
राधामोहन मिश्र माधव
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