Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

गौरैया

 गौरैया  


फुदक-फुदक आती गौरैया ।

नन्हीं-मुन्नी , प्यारी-प्यारी 
सब अंगों से लगती न्यारी ।
चीं-चीं , चूँ-चूँ  बोल-बोल कर
दिल बहलाती है गौरैया ।

लगती जैसे मैया-भैया ।

चावल के दाने चुगती है 
डुबक-डुबक पानी पीती है।
गाढ़े-भूरे , कुछ सफेद-सी  
मन को भाती है गौरैया ।

दे दो दाने , नहीं रुपैया ।

तिनके ढूँढ़े गली-गली 
ढोकर लाती भली-भली ।
उन्हें सजा करके गवाक्ष में 
नीड़ बनाती है गौरैया ।

अंडे-बच्चे होंगे दैया ।

चिड़ा-चिड़ी दोनों गौरैया 
कोमल प्राणी है गौरैया ।
तन-मन की सुंदर गौरैया 
सबके मन भाती गौरैया ।

दे दो शरण रहे गौरैया ।

राधामोहन मिश्र माधव
दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ