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खेल WTO से निजात का

खेल WTO से निजात का
लेखक मनोज मिश्र इंडियन बैंक के अधिकारी है|

बाद शोर है साहब चीन हमारी सीमा में घुस गया। चीन हमारी जमीन पर कब्जा किये बैठा है। सरकार चीन का नाम लेने से डरती है, इत्यादि इत्यादि। 
चीन भी है कि घुस तो आया है पर वापसी उसे भी भारी है।जैसे ही चीन पीछे हटने लगता है वैसे ही भारत कुछ न कुछ ऐसा कर देता है कि वह पीछे न हट पाये... जैसे कि हालिया प्रधानमन्त्री पहुंच गए लेह!* 

तो ये भारत चीन के बीच का जो मामला चल रहा है बहुत से लोगों को आइडिया भी नहीं है कि ये खेल क्या है... इस पर थोड़ी रौशनी डालने  की एक कोशिश करते हैं: 

आपने देखा होगा कि कांग्रेसी कहते रहते हैं की चीन अन्दर घुस आया ... चीन अन्दर घुस आया... और सरकार कहती है कि नहीं घुसा नहीं घुसा... फिर भी आपने बहुत से समझदार लोगों को यही कहते सुना होगा कि चीन अन्दर ही आया हुआ है... ऐसा सब टेक्निकल भाषा की वजह से कनफ्यूज़ होता है ... लेकिन सच तो यही है कि चीन उस क्षेत्र में घुसा हुआ है जो कि बफर ज़ोन है... यानी जो बीच में खाली छोड़ा जाता है। और वह ज़रूरत से ज़्यादा घुसा हुआ है... तो एक तरह से वह भले भारत की क्लीयर क्लीयर सीमा में नहीं है... यानी हमारी कोई पोस्ट उनके कब्जे में नहीं है ... लेकिन बफर ज़ोन में वह कुण्डली मारे बैठा ज़रूर है...चीन के साथ भारत की सीमा निर्धारित नहीं है। वहां लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल है। यानी यहां तक हमारा कब्जा है वहां तक आपका बीच के इलाके पर दोनों का दावा है। 

लेकिन इसका असल सच ये है कि भारत ने उसे वहां फंसा लिया है... भारत ने उसे दाना डाल कर अपने जाल में फंसाया है... और अब न आगे बढ़ने देगा न पीछे हटने दे रहा है: 

परन्तु क्यों? 

तो जनाब इसके लिए आपको भारत की नीति समझनी होगी... कि जो दिखाई देता है वह असल में होता नहीं है... और जो होता है वह असल में दिखाई नहीं देता है...

असल में है क्या? असल में ये है कि हमारे प्रिय पूर्व प्रधानमन्त्री सरदारजी चुप्पी सिंह जी के समय में बहुत सारे काण्ड हुए... जिसकी वजह भी ये कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच का करार ही थी... जो देखने में काण्ड जैसे नहीं लगते हैं लेकिन समझने में लगते हैं... इसकी वजह से चीनी कम्पनियां भारत में आईं... चीनी सरकार इनको सब्सीडी देती रही, जिसकी वजह से उनके सामान हमारे यहां लागत से भी सस्ते पड़ने लगे... तो हमारे लघु उद्योग अगर लागत पर भी बेचें तब भी चीन से सस्ता न दे पाएं... इसकी वजह से हमारे सब घरेलू उत्पादन बन्द... ठप्प। और इस सब में हमारे देश को 30 लाख करोड़ का घाटा हुआ है... और चीन को समझिए कि इससे भी ज़्यादा फायदा... तो यह कांग्रेस चीनी पार्टी घोटालेबाजी असल में 30 लाख करोड़ की है।

अब इन चीनी कम्पनियों को भारत कैसे भगाये? क्योंकि WTO का सदस्य होने के नाते भारत ऐसे ही तो इनसे व्यापार बन्द नहीं कर सकता... न ही प्रतिबन्ध लगा सकता। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा होने पर सब हो जाता है... इसलिए भारत ने यहां ऐसे ऐसे बयान देना शुरू किया जिससे कि चीन भड़के... 

आपको अमित शाह का संसद में दिया गया वह बयान याद होगा जिसमें उन्होंने खूब ज़ोर से कहा था कि जान दे देंगे... लेकिन अपनी ज़मीन नहीं देंगे... और जिसमें पीओके के साथ साथ आक्साई चिन का भी ज़िक्र किया था। बस तभी से चीन को आक्साई चिन जाने का डर सता रहा है... साथ ही गिलगित बाल्टिस्तान में तो चीन की जान फंसी हुई है क्योंकि उसके बिना तो उसकी वन बेल्ट वन रोड ही फंस जाएगी... जिस पर चीन अरबों डॉलर लगा ही चुका है...

तो चीन ने अन्दर आना ही था... लेकिन वह इस बात के लिए तैयार नहीं था कि भारत ऐसी प्रतिक्रिया देगा और बात लड़ाई तक आ जाएगी... बार्डर पर सैनिक भिड़ गए और दोनों तरफ के सैनिक बीरगति को प्राप्त हुए... बस यहीं से मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का बन गया है... और अब इस राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को बीच में ला कर भारत धड़ाधड़ चीनी कम्पनियों को बाहर का रास्ता दिखाये जा रहा है... 

वह इसे ऐसे ही नहीं कर सकता था... लेकिन अब कर सकता है... इसलिए जैसे ही चीन पीछे हटने की भी कोशिश करता है तो भारत उसे फिर से उकसा देता है... हटने नहीं दे रहा... कि भैया अभी हमने सब चीनी कम्पनियों का इलाज नहीं किया था... तुम कहां चले...?

लड़ाई एक अलग मसला है... लेकिन पहले भारत चीन की रीढ़ पर प्रहार करेगा... जैसे पाकिस्तान की तोड़ी है... वैसे चीन की पूरी तरह तो नहीं तोड़ सकता लेकिन उसे कमजोर और खुद को सशक्त तो अवश्य कर सकता है... युद्ध तो किसी के भी हक़ में नहीं... इसलिए बड़े स्तर का युद्ध न भारत करेगा और न चीन... कम से कम फिलहाल नहीं करेगा... लेकिन होने को कुछ भी कभी भी हो जाये वो अलग बात है...

सीमा पर तनाव बनाए रखना अब भारत के और विश्व के हक़ में है... और भारत यही कर रहा है... चीन की रीढ़ पर भारत अपने हिस्से का प्रहार कर रहा है... बाकी विश्व अपने हिस्से का करेगा।
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