कोरोना का असर फसलों पर गंभीर रूप से पड़ता नजर आ रहा है। मूंग कटाई तो जैसे तैसे हार्वेस्टर के कारण हो गई, लेकिन धान की रोपाई के लिए मजदूर को लेकर किसान परेशान हैं। आलम यह है कि प्रति एकड़ धान की रोपाई पर डेढ़ से दो अधिक लग रहे हैं और काम भी बराबर नहीं हो रहा है। मजदूरों की एडवांस बुकिंग चल रही है।
कृषक गुलाब सिंह बैंकर ने बताया कि इस बार प्रति एकड़ धान की रोपाई में 4 हजार से लेकर 5 हजार रुपए तक का खर्च आ रहा है। गत वर्ष यही धान 3 हजार रुपए एकड़ में आसानी से लग गई थी। इस बार बाहर के मजदूर नहीं आने के कारण स्थानीय स्तर पर ही मजदूरों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। बैंकर ने बताया कि धान की रोपाई करने के लिए बाहर से मजदूरों के दल आया करते थे।
वह इस काम में खासे निपुण होते हैं और ठेके पर काम बड़ी कुशलता के साथ करते थे, लेकिन कोरोना के कारण इस बार बाहरी मजदूर नहीं आए हैं। किसानों के पास उनके फोन नंबर हैं फोन पर बात भी चल रही है, लेकिन मजदूर आने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
ग्राम शंखिनी के कृषक भोजपाल चौधरी ने बताया कि बिहारी मजदूरों के अलावा छिंदवाड़ा, बालाघाट, शहडोल आदि जगह से बड़ी संख्या में आदिवासी मजदूर आते थे। इस बार वह भी नहीं आ रहे हैं। ग्राम ऊंटिया के किसान केसरीनंदन पटेल ने बताया कि मैं तो मूंग की खेती में पूरी तरह बर्बाद हो गया हूं। मेरे पांच एकड़ में 6 क्विंटल मूंग भी नहीं निकली। अब मजदूरों की कमी के चलते अब धान की खेती करने की हिम्मत नहीं हो पा रही है।
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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/piparia/news/farmers-have-to-pay-two-thousand-rupees-more-per-acre-due-to-shortage-of-laborers-the-cost-of-planting-paddy-of-farmers-increased-127490275.html

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