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आखिर किस कारण से जमें है सचिवालय सुरक्षा प्रभारी डी.एस.पी प्रेम चंद सिंह एवं उनकी इंस्पेक्टर पत्नी उमा सिंह पिछले बीस साल से अधिक समय तक पटना में ?

आखिर किस कारण से जमें है सचिवालय सुरक्षा प्रभारी डी.एस.पी प्रेम चंद सिंह एवं उनकी इंस्पेक्टर पत्नी उमा सिंह पिछले बीस साल से अधिक समय तक पटना में ?

 

बिहार में कुशासन की सरकार और बाहुबलियों की सरकार कार्य कर रही है इसका जीता जगता उदाहारण है सचिवालय सुरक्षा प्रभारी डी.एस.पी प्रेम चंद सिंह एवं उनकी इंस्पेक्टर पत्नी उमा सिंह पिछले बीस साल से अधिक समय तक पटना में ही कैसे बने हुए है जबकि पुलिस मैन्युअल के अनुसार यह सम्भव नहीं है |

आश्चर्य होता है जानकर बिहार सरकार चुनाव आयोग के आदेशों को अब तक धत्ता बताते हुए एवं चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों को रद्दी की टोकरी का मसला मानते हुए पुलिस मुख्यालय बिहारगृह मंत्रालय बिहार सरकार एवं कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग बिहार सरकार आखि़र क्यों और किन उदेश्‍यों और मेहरबानियों से प्रेरित होकर बल्कि बिहार सरकार के पब्लिक सर्विस ट्रांसफर पोस्टिंग रूल एवं पुलिस हस्तक नियमावाली को जानबूझ कर अनदेखा कर विगत बीस साल से पटना में पदस्थापित कर अनुचित लाभ दे रहा है ? इन दोनों पति पत्नी के कारण पुलिस खेल कूद भ्रष्टाचार और व्यभिचार का अड्डा बन गया है | इस विभाग में  व्याप्त गन्दगी के प्रभाव से आज बिहार पुलिस खेल कूद को अपूरणीय क्षति, दुर्गति और बदनामी के हो रही है आज भी ये मिथलेश स्टेडियम के ऑफिसर क्वाटर नंबर 1 में टिके हुए हैं जबकि ऑफिसर क्वाटर नंबर 1 खाली करने का आदेश भी जारी हो चूका था I लेकिन ये पति पत्नी अपने तिकड़मबाजी के द्वारा इस क्वाटर में टिके हुए हैं और ये पति पत्नी तिकड़मबाजी करने में इतने शातिर है की लगातार बीस वर्षों से राजधानी पटना में बने हुए हैं आखि़र ये किन किन लोगों किन राजनेताओं किन आईएएस उच्चाधिकारियों किन आईपीएस उच्चाधिकारियों के विशेष कृपा से अनुचित और अन्याय पूर्ण लाभ उठा रहे हैं इस पर आजतक करवाई क्यों नहीं की गई? कही न कही पुलिसि खेलकूद में होने वाले फर्जीवाड़ा, घपले-घोटाले के तार विभाग के उच्य अधिकारियो तक जुड़े हुए है | सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दोनों के शैक्षणिक सर्टिफिकेट्स भी नकली है तथा इन्हों ने पुरस्कारों एवं मेडलों के लिए भी फर्जीवाड़े एवं  चीटिंग किये है | ज्ञात हो इनके उपर गंभीर आरोप लगनेवाले भारतीय जन क्रान्ति दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश कुमार चौबे पर किसप्रकार से इन लोगों ने पुलिस प्रताड़ना की थी यह भी जग जाहिर है | इसके बाबजूद इनपर लगे गम्भीर से गम्भीर आरोपों के फेहरिस्त और जाँच के दौरान उजागर तथ्यों तथा बचाव के पहलुओं पर दृष्टि डाल कर बिहार सरकार के संबंधित विभागों ने आज तक जाँच कर कानून सम्मत कारवाई क्यों नहीं की ? इससे लगता है पूरी पुलिस महकमे के लोग इन दोनों से भयभीत है या अपने राज जाहिर होने के डर से इन दोनों पर कोई करवाई नहीं करते |जब इस संदर्भों में भारतीय जन क्रान्ति दल के प्रवक्ता ने कई बार पुलिस मुख्यालय को एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा तो उलटे उन्हें हीं प्रताड़ित करने का उच्च स्तरीय षड्यंत्र किया गया ,  पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ चंद अधिकारियों के षड़यंत्र के कारण उन्हें तबाह एवं बर्बाद करने की कोशिश की गई एवं अभी तक उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है| उनके परिवार के जानमाल को नुकसान पहुचने की साजिश रची गई झूठे मुकदमे में जेल भेज उनकी हत्या की भी साजिश रची गई | आखिर अपने को स्वक्ष्य छवि का दंभ भरनेवाले बिहार के सुशासन के प्रणेता मुख्यमंत्री जी करवाई क्यों नहीं कर रहें ?

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