चुनाव में बनते जातीय संगठन |
डॉ राकेश दत्त मिश्र , सम्पादक दिव्य रश्मि
एक बड़ा ही आश्चर्यजनक किन्तु सत्य है जब जब भी चुनाव नजदीक आता है विभिन्न जातीय संगठनों के नेता अपने अपने बिरादरी की पार्टी बनाकर चुनाव आयोग से रजिस्ट्रेशन करा लेते है और चुनाव के समय बडी पार्टी से बिरादरी के वोटो का भय दिखाकर उनसे मोलभाव करते हैं और मोटी रकम लेकर कर बैठ जाते हैं।भोली भाली जनता और उनके बिरादरी के लोग जातीय भावनाओं में बहकर वोट भी दे देते है।चुनाव के समाप्त होते ही जातीय पार्टियां गायब हो जाती है।पांच साल उनके बिरादरी के लोगो का उत्पीड़न होता है अत्याचार होता है तब उन तथाकथित पार्टियो के न तो राष्ट्रीय अध्यक्ष दिखायी देते हैं और न उनकी पार्टियो से लडने वाले नेता उनकी मदद करने को आगे आते हैं।यह दुर्भाग्य है कि भोली भाली बिरादरी लूटती पिटती है और उनकी कोई मदद कोई नहीं करता।सबसे बडी बात है कि इन जातिगत पार्टियों का न कोई घोषणा पत्र जारी होता है और न इनका कोई राष्ट्रीय या प्रदेशीय कार्यक्रम या योजना चलाया जाता है।केवल चन्दा एकत्र करना उनका लक्ष्य होता है जिसकी न सूची बनती है और न अखबारो व समाचार पत्रों में इसका आय ब्यय का ब्योरा दिया जाता है। जब अगला चुनाव नजदीक आता है तो यह पार्टियां पुन: सक्रिय हो जाती है।ऐसी पार्टियां जाति के नाम पर थोडे थोडे वोट काटकर बडी और जन कल्याण करने वाली पार्टियो को सरकार बनाने से रोक देते है।यह दुर्भाग्य अक्सर पिछडे वर्गों में ही होता है जहां पर कुछ लोग जातीय पार्टियां बनाकर यह खेल खेलते है जिसके कारण पिछडे वर्गो के वोटो का बिखराव हो जाता है और पिछडे वर्गों का भला करने वाली पार्टी की सरकार नही बन पाती है और न पिछडे वर्गो को सरकार मे पर्याप्त हिस्सेदारी मिल पाती है।ये लोग सामाजिक न्याय की ताकतों को कमजोर करते है और सामन्तवादी ताकतो को परोक्ष रूप से मजबूत करते हैं।इससे पिछडे वर्गो का बहुत बडा नुकसान हो रहा है। पिछडे वर्गो को गम्भीरता से सोचना होगा और अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये वोटो का बिखराव रोकना होगा और एक जगह एकजुट होकर सरकार बनाने की दिशा मे अग्रसर होना होगा।जातीय भावनाओं में बहकर अपने वोटो का बंटवारा करने से हम सदियो पीछे चले गये।दुर्भाग्य से यह बीमारी विश्वकर्मा समाज में भी प्रवेश करने वाली है।ऐसे वोट काटने वाली पार्टियों से सावधान हो जाइये और अपनी भागीदारी अपना अधिकार अपना विधायक अपना मन्त्री बनाने के लिये अभी से एक जुट हो जाइये तभी आपके बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
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