संकल्प
अपने संकल्पों को
घनीभूत करना चाहता हूं
इसलिए बचाना चाहता हूं
खुद को
उन विचारों से
जिसकी तह में
बैठा है अहंकार
मैं नहीं चलना चाहता
उन राहों पर
जिन पर नहीं हैं
उन पैरों के निशान
जो बोलती हैं बहुत कुछ
मौन होकर भी
मैं नहीं भूलना चाहता
उन शब्दों के अर्थ
जो बचे हुए हैं
समय के साथ
यदि ऐसा कर पाता हूं
तो दे पाऊंगा
अपनी कविता को प्राण
जो मुझे जिंदा रखेगी
मेरे संकल्पों के साथ ।
-- वेद प्रकाश तिवारी
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