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सफेद_बाल


सफेद_बाल

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आने दो
सफेद बालों को
पड़ने दो 
चेहरे पर झुर्रियाँ । 
यह करो स्वीकार
कि शामिल है 
शरीर की यात्रा में
उम्र का यह भी पड़ाव । 
जो देखते हैं अपने को
स्थूल रूप में
उनकी संपूर्ण ऊर्जा 
केंद्रित है उसके रंगरोहन में
शरीर का है अपना धर्म
जो मनुष्य करता है इसे
सहज रूप में स्वीकार
वह हो जाता है
मन के पार  । 
मन का विरोध 
कहलाता है योग
और जो है स्थिर योग में
उसी ने पाया
अपने होने का अर्थ । 

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