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मुस्कान

मुस्कान

आभा दवे,   मुंबई


अधरों  पर जब उतर आती है हल्की सी मुस्कान
तो ना जाने कितनों को कर देती है शांत
सारी थकान मिट जाती है जब कोई कली मुस्काती है
नन्हीं सी प्यारी सी हँसी सब को लुभाती है ।

भोलापन दिए सादगी मन को छू जाती है
ठंडी हवा के झोंकों की तरह शीतल कर जाती है
ये नन्हीं सी मुस्कान ही जीवन में खुशियाँ लाती है
इसी हँसी से हरा -भरा  रहे जग का कोना -कोना ।

जो दुनिया को सिखलाता है जग में बच्चों का होना
जो अपनी किलकारियों से हर लेते हैं सब के गम
न जाति -पाँती ना अमीरी गरीबी का भरते दम
बस इसी तरह अधरों पर सजती रहे मुस्कान सदा
और सारा जहाँ रहे हरा भरा ।



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