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आइसोलेशन सेंटर से प्रवासियों का बाहर आना-जाना आम बात है |

आइसोलेशन सेंटर से प्रवासियों का  बाहर आना-जाना आम बात है |

हमारे संवाददाता मुकेश कुमार की रिपोर्ट
पटना जिला अंतर्गत खुसरूपुर प्रखंड के शुक्र वेग चक ग्राम पंचायत के अंतर्गत स्थित मध्य विद्यालय में आइसोलेशन सेंटर बनाए गए हैं। ऐसी कोई भी पंचायत बची हुई नहीं है जहां प्रखंडस्तरीय एक-दो आइसोलेशन सेंटर न हो। कुछ आइसोलेशन सेंटरों को छोड़कर कहीं भी पूरी सुरक्षा की व्यवस्था तक नहीं है। यही वजह है कई आइसोलेशन सेंटरों से प्रवासियों के बाहर आने- जाने की सूचना मिलती रहती है। अव्यवस्था की हालत यह है की इस सेंटर में रह रहे लोगों को न तो खाने को कुछ मिलता है ना ही सोने के लिए विछाबन | हालत यह है कि कोरोंटाइन का मजाक बन चूका है , जब जिसकी मर्जी अपने घर पर जा सकता है कोई रोकने टोकने वाला नहीं है | ग्राम की मुखिया शांति देवी ने बताया कि हमें सरकार की ओर से कुछ नहीं मिला है इसलिए मैं कुछ नहीं कर सकती अभी तक इस गांव में सैनिटाइजर का छिड़काव तक नहीं किया गया है यहां के लोग कोरोना वायरस जैसे महामारी के समय में बाहर से आ रहें है , हमें प्रवासी मजदूरों से काफी डर लगा रहता है | आइसोलेशन सेंटर के संचालन को लेकर सरकार की ओर से जितनी व्यवस्था है, उस हिसाब से हैंड्स और मॉनिटरिंग की घोर कमी देखी जा रही है। आइसोलेशन सेंटर से होम क्वारंटाइन का लोग मतलब भी नहीं समझ रहे हैं। आइसोलेशन सेंटर से आने के बाद प्रवासी मजदूर खुलेआम गांव के चौक-चौराहों से लेकर हाट-बाजारों में घूमते रहते हैं। सेंटर में अभी कुल १८ मजदूर रह रहे हैं जो अपने हालत को खुद बता रहें है वो कितने कष्ट के बाद अपने गाँव वापस लौट पाये और यहाँ भी कष्ट सहने को मजबूर है |
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