अयलउ आंधी घेरकउ बदरिया ।
अयलउ आंधी घेरकउ बदरिया ।
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।
भइबा-बहिनी एक्के साथ ।
रहिहें दुनों जोड़यले हाथ ।।
पीछे-पीछे बाबा-मामा
लेले बट्टा-मउनी माथ ।।
दउड़ल अयतउ बाप-मतरिया ।
ये ओम आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।
बादल गरजउ बिजुली चमकउ
तइयो न तू तनिको डरिहें !
सुझतउ न जो गिरलका अम्मा
टॉर्च मोबाईल साथे रखिहें !
घुचघुच करिया रात अन्धरिया ।
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।
डाली टुट के परल पटउर ।
भर गेलउ सब टाँड़ अउ छउर ।
बल्ला पर से बिगहा पर तक
अहरा झरहा आउ घोड़दउर ।।
लइकन सब दउड़ित धन्धरिया ।
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया !
गउआँ पर घनघोर बगइचा ।
उहाँ लेहें मोल आउ पइंचा ।।
इहाँ खेत में बूनल सगरो
मोरी मकइ सनइ आउ ढइंचा ।।
कइसन हें तू सोनभदरिया ?
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।
तू चल गेलें पुरनियाँ टाउन ।
इहाँ लगल हउ लौको डाउन ।।
तू तो अयलें आम न चुने
चुन लेलकउ सब नउआ नाउन ।।
चल गेलउ चितचैन बधरिया ।
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।
कवि चितरंजन 'चैनपुरा' , जहानाबाद, बिहार,
दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews