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अयलउ आंधी घेरकउ बदरिया ।(मगही कविता)

अयलउ आंधी घेरकउ बदरिया ।


अयलउ आंधी घेरकउ बदरिया ।
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।

भइबा-बहिनी एक्के साथ ।
रहिहें दुनों जोड़यले हाथ ।।
पीछे-पीछे बाबा-मामा 
लेले बट्टा-मउनी माथ ।।

दउड़ल अयतउ बाप-मतरिया ।
ये ओम आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।

बादल गरजउ बिजुली चमकउ 
तइयो न तू तनिको डरिहें !
सुझतउ न जो गिरलका अम्मा 
टॉर्च मोबाईल साथे रखिहें !

घुचघुच करिया रात अन्धरिया ।
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।

डाली टुट के परल पटउर ।
भर गेलउ सब टाँड़ अउ छउर ।
बल्ला पर से बिगहा पर तक 
अहरा झरहा आउ घोड़दउर ।।

लइकन सब दउड़ित धन्धरिया ।
 ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया !

गउआँ पर घनघोर बगइचा ।
उहाँ लेहें मोल आउ पइंचा ।।
इहाँ खेत में बूनल सगरो 
मोरी मकइ सनइ आउ ढइंचा ।।

कइसन हें तू सोनभदरिया ?
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।

तू चल गेलें पुरनियाँ टाउन ।
इहाँ लगल हउ लौको डाउन ।।
तू तो अयलें आम न चुने 
चुन लेलकउ सब नउआ नाउन ।।

चल गेलउ चितचैन बधरिया ।
ये ओम ! आम चुने चलिहें चन्धरिया ।।

कवि चितरंजन 'चैनपुरा' , जहानाबाद, बिहार, 
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