झुंझुनूं की रुनझुन, शहादत की अमर धुन

झुंझुनूं की रुनझुन, शहादत की अमर धुन

कुमार महेंद्र
सर्वाधिक शहीदों की जन्मी यह धरा,
कण-कण में अथाह शौर्य की गाथा।
रोम-रोम में देशप्रेम की धारा,
ध्येय विजय, जय श्री भारत माता।
हर गाँव-ढाणी, नगर की परिधि,
शहीद मूर्तियाँ, दर्शन सगुन।
झुंझुनूं की रुनझुन, शहादत की अमर धुन।।


शहीद स्मरण अद्भुत, अनुपम,
पूजा-आराधना समान भगवान।
बाज़ार, चौपाल वीर-वृत्तांत,
संवादों में राष्ट्र-सेवा का आह्वान।
संस्थापक वीर जुझार सिंह जी,
सदा प्रेरणापुंज इतिहास सुन।
झुंझुनूं की रुनझुन, शहादत की अमर धुन।।


प्रथम-द्वितीय विश्वयुद्ध सहित,
स्वतंत्रता संग्राम का अथक संघर्ष।
पाँच सौ से भी अधिक शहीद गौरव,
धरा हेतु सर्वस्व अर्पण सहर्ष।
हँसते-हँसते प्राणों की आहुति,
सीमा पर पूर्ण हुआ भारती प्रण।
झुंझुनूं की रुनझुन, शहादत की अमर धुन।।


जहाँ शहादत पर नाज़ हो हर क्षण,
वो धरा अमरत्व को पा जाती।
तिरंगे में लिपटे वीरों के तन जहाँ,
नयन नम, पर शोणित मुस्कान सजाती।
शहीदों के नाम सजे मार्ग-विद्यालय,
प्रातः-संध्या शहीद गाथाएँ गुन।
झुंझुनूं की रुनझुन, शहादत की अमर धुन।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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