डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप और मोटापे पर नियंत्रण के लिए अपनाएं स्वस्थ जीवनशैली|

डॉ. निशि कान्त, कमान्डेंट (मेडिकल), एस. एस.बी. |
भारत में डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और मोटापा तेजी से गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में उभर रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों लोग इन बीमारियों से प्रभावित हैं, जो आगे चलकर हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी फेल्योर जैसी घातक स्थितियों का कारण बन सकती हैं।
विश्व स्वस्थ्य दिवस के अवसर पर, सशस्त्र सीमा बल, सीमान्त मुख्यालय पटना में आयोजित एक स्वस्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कमांडेंट (मेडिकल) डॉ. निशि कान्त ने कहा कि ये तीनों बीमारियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और इनका मुख्य कारण असंतुलित जीवनशैली है। उन्होंने बताया कि खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव और अपर्याप्त नींद इन रोगों को बढ़ावा देते हैं।
डॉ. निशि कान्त के अनुसार, इन बीमारियों के नियंत्रण के चार प्रमुख स्तंभ हैं—संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि दैनिक आहार में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें तथा नमक, चीनी और जंक फूड का सेवन कम करें। साथ ही, आंतों के स्वास्थ्य (गट हेल्थ) पर भी ध्यान देने को कहा, जिसके लिए दही, छाछ और किण्वित खाद्य पदार्थ लाभकारी हैं।
नियमित शारीरिक गतिविधि पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट तेज़ चलना, योग या व्यायाम करना चाहिए। इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहने से बचना भी जरूरी है।
वजन नियंत्रण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि पेट के आसपास जमा चर्बी सबसे अधिक खतरनाक होती है। इसके साथ ही मानसिक तनाव को कम करने के लिए ध्यान, प्राणायाम और पर्याप्त नींद (7–8 घंटे) लेना जरूरी है।
नशे से दूरी अति आवश्यक: धूम्रपान और शराब हृदय और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। धूम्रपान और शराब हृदय और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों की संभावनाएं काफी अधिक हो जाती हैं | इसके साथ ही रक्त वाहिकाओं का संकुचन, धमनियों में चर्बी का जमाव (एथेरोस्क्लेरोसिस), हृदय की कार्यक्षमता में कमी, तथा हृदयाघात (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
धूम्रपान से रक्त में ऑक्सीजन की कमी होती है और रक्त गाढ़ा हो जाता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है, जबकि अत्यधिक शराब सेवन शरीर की इंसुलिन क्रिया को प्रभावित कर टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है।
इन सभी प्रभावों के कारण हृदय, मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति कमजोर हो जाती है।
यदि किसी व्यक्ति को ये बीमारियां हो चुकी हैं, तो नियमित जांच और चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन की नियमित निगरानी जरूरी है, वहीं डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सेवन नियमित तरीके से करना चाहिए ।
प्रत्येक व्यक्ति के लिए डाइट और व्यायाम की योजना अलग हो सकती है, ऐसे में विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। जीवनशैली में स्थायी सुधार ही इन बीमारियों पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय है ।
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