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बेटी ने पूछा...

बेटी ने पूछा...

संजय जैन
मम्मी पापा मुझको बतलाओ
अनजाने से रिश्ता क्यों जोड़ दिया।
अपने दिल के टुकड़े को
कैसे तुमने उसे सौप दिया।।
मम्मी पाप मुझको..........।।

इतने वर्षो तक मुझको
आपने पाला पोषा है।
दिल के हर कोने से
मेरा आपका रिश्ता है।
बेटी होकर भी मुझको
आपने बेटा माना है।
फिर क्यों मेरा रिश्ता
एक अनजाने से कर दिया।।
मम्मी पापा मुझको....।।

एक-एक पैसा जोड़कर आपने
मुझको खूब पढ़ाया-लिखाया है।
जीवन के हर सुख देकर
मुझको काबिल बनाया है।
जब मेरी बारी आई तो
ब्याह मेरा कर दिया।
अपने घर आंगन को तुमने
फिर से सुना कर लिया।।
मम्मी पापा मुझको.....।।

जितना कमाया धमाया आपने
हम सब लोगों पर खर्च किया।
कभी दादा-दीदी की दवाई तो
कभी बुआ का ब्याह किया।
और बचा जो कुछ तो
ब्याह हमारे में लगा दिया।
अपने लिए आप दोनों ने
कुछ भी पास नही रखा।।
मम्मी पापा मुझको......।।

अब मेरा भी फर्ज बनता है
मात-पिता के लिए करू कुछ।
ब्याह होने के बाद भी मैं
अपना कर्तव्य निभाऊँगी।
दोनों परिवारों का अब मैं
मान सम्मान बढ़ऊँगी।
अपने जीवन साथी का मैं
हर पल साथ निभाऊँगी ..२।।

मम्मी पापा मुझको बतलाओं
अनजाने से रिश्ता क्यों जोड़ दिया।
अपने दिल के टुकड़े को
कैसे तुमने उसे सौप दिया।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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