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बिहार में जनगणना 2027 का पहला चरण 2 मई से, इस बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया

बिहार में जनगणना 2027 का पहला चरण 2 मई से, इस बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया

  • 17 अप्रैल से शुरू होगी स्व-गणना सुविधा, घर बैठे भरें जनगणना विवरण
  • 1 मई तक स्व-गणना का मौका, 2 मई से शुरू होगा घर-घर सर्वे
  • जनगणना 2027: अब मोबाइल और कंप्यूटर से खुद दर्ज करें अपनी जानकारी
  • जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत डेटा पूरी तरह गोपनीय
  • सभी डिजिटल टूल्स में एन्क्रिप्शन के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित
  • जनगणना से जन-कल्याण’: नागरिकों से स्व-गणना में भागीदारी की अपील
  • सरल, सुरक्षित और समय-बचत वाली प्रक्रिया: स्व-गणना अपनाने की अपील

📰 डिजिटल युग की ओर ऐतिहासिक कदम: बिहार में 2 मई से शुरू होगी जनगणना 2027 का पहला चरण

पटना, 15 अप्रैल 2026।
बिहार में जनगणना 2027 को लेकर एक महत्वपूर्ण और आधुनिक पहल की शुरुआत होने जा रही है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी, जिससे न केवल प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी भी पहले से अधिक आसान हो जाएगी।

पत्र सूचना कार्यालय (PIB), पटना एवं जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में निदेशक रंजीता और उपनिदेशक संजीव कुमार ने इस महत्वाकांक्षी अभियान की विस्तृत जानकारी साझा की।
📅 2 मई से शुरू होगा पहला चरण

जनगणना 2027 के तहत बिहार में प्रथम चरण “मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना” का कार्य
🗓️ 02 मई 2026 से 31 मई 2026 तक चलेगा।

इस दौरान प्रगणक (Enumerator) घर-घर जाकर मकानों और परिवारों से संबंधित आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। यह चरण आगे होने वाली जनगणना की आधारशिला तैयार करेगा।
💻 17 अप्रैल से 1 मई तक स्व-गणना का अवसर

इस बार जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता है Self Enumeration (स्व-गणना) की सुविधा, जिसके तहत नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।

🗓️ अवधि: 17 अप्रैल 2026 से 01 मई 2026


🌐 पोर्टल: https://se.census.gov.in


📱 किसी भी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन संभव


👨‍👩‍👧‍👦 परिवार की पूरी जानकारी घर बैठे भर सकते हैं

जानकारी भरने के बाद एक Self Enumeration ID प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। प्रगणक के घर आने पर यह ID दिखानी होगी, जिससे प्रक्रिया और अधिक सरल और त्वरित हो जाएगी।
🔐 डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।

📜 यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत संचालित होती है


🔒 सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग


🛡️ नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी को पूर्ण गोपनीयता

इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी नागरिक की निजी जानकारी का दुरुपयोग न हो।
🌟 स्व-गणना: समय की बचत और सुविधा का संगम

स्व-गणना सुविधा को अपनाने से नागरिकों को कई लाभ मिलेंगे—

🏠 घर बैठे आसान प्रक्रिया


⏳ समय और संसाधनों की बचत


📊 सटीक और त्वरित डेटा संग्रह


🤝 जनगणना कार्य में सक्रिय भागीदारी

यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो व्यस्त दिनचर्या के कारण घर-घर सर्वे के समय उपलब्ध नहीं हो पाते।
📢 “जनगणना से जन-कल्याण” की अपील

जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और स्व-गणना की सुविधा का अधिकतम उपयोग करें।

सरकार का मानना है कि सटीक और व्यापक जनगणना डेटा से ही भविष्य की योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यों को सही दिशा मिल सकेगी।
🔎 निष्कर्ष

बिहार में जनगणना 2027 केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि डिजिटल भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है। स्व-गणना जैसी आधुनिक व्यवस्था से यह अभियान अधिक सहभागी, पारदर्शी और प्रभावी बन रहा है।

अब यह नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण 'मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना' का कार्य बिहार में 02 मई 2026 से 31 मई 2026 तक होने जा रहा है। इस बार जनगणना पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी, जिसमें नागरिकों के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
बिहार राज्य में स्व-गणना (Self Enumeration) की अवधि 17 अप्रैल 2026 से 01 मई 2026 तक निर्धारित है। इस अवधि में राज्य के नागरिक https://se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में परिवार के मुखिया का नाम एवं किसी भी एक सदस्य के मोबाईल नंबर से पंजीकरण कर सकते हैं। स्व-गणना करने के पश्चात एक Self Enumeration ID प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा और प्रगणक के घर आने पर उन्हें उपलब्ध कराना होगा।

स्व-गणना की सुविधा सुरक्षित, सरल एवं समय की बचत करने वाली प्रक्रिया है। इससे नागरिकों को घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी तथा जनगणना कार्य को समयबद्ध एवं सुगम तरीके से संपन्न करने में सहायता मिलेगी। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्र किया गया ये डेटा पूरी तरह से गोपनीय है। सभी डिजिटल टूल्स में डेटा एन्क्रिप्टेड है, जो नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

जनगणना कार्य निदेशालय बिहार के सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि "जनगणना से जन-कल्याण" के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए स्व-गणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।


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