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मार्च 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार

मार्च 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार

हर हर महादेव!!

मैं आप सबको और आप सबके हृदय में विराजमान ईश्वर को प्रणाम करता हूं और धन्यवाद करता हूं। अंग्रेजी कैलेंडर का मार्च महीने में भारतीय सनातन पंचांग के अनुसार फाल्गुन और चैत्र का संयुक्त महीना होता है। अतः फाल्गुन और चैत्र माह के अधिपति देवी देवताओं को नमन करते हुए, उनका धन्यवाद करते हुए आइए हम चर्चा करते हैं मार्च 2026 के कुछ महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों के बारे में।


4 मार्च से 19 मार्च 2026 तक चैत्र कृष्ण पक्ष होगा। 20 मार्च 2026 से 2 अप्रैल 2026 तक चैत्र शुक्ल पक्ष होगा।


चैत्र का महीना हिंदू पंचांग के अनुसार बड़ा ही महत्वपूर्ण माना जाता है। चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू सनातन कैलेंडर का नया वर्ष आरंभ होता है। जिसे विक्रम संवत के नाम से जानते हैं। अभी वर्तमान समय में विक्रम संवत 2082 चल रहा है। 19 मार्च 2026 गुरुवार से नया विक्रम संवत 2083 आरंभ हो जाएगा। हिंदू सनातन पंचांग अर्थात कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष का एक नाम होता है जो अंग्रेजी कैलेंडर में नहीं होता। विक्रम संवत 2083 का नाम होगा *रौद्र*। अर्थात पूरे वर्ष अगले संवत्सर 2084 के पहले तक होने वाले प्रत्येक शुभ कार्य में, पूजा पाठ, विवाह, गृह प्रवेश, संकल्प इत्यादि में रौद्र नाम के संवत्सर का नाम संकल्प में प्रयोग किया जाएगा।


दिव्य रश्मि पत्रिका परिवार की तरफ से सभी देशवासियों को हिंदू नया वर्ष विक्रम संवत 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं। मां जगदंबा और महादेव की कृपा से हम सब का कल्याण हो। पूरे विश्व का कल्याण हो। धर्म की जय हो!! अधर्म का नाश हो!! प्राणियों में सद्भावना हो!!


ऐसी मान्यता है की चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था। अर्थात भगवान ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को ही सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। शास्त्रीय विधान के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को जो दिन पड़ता है उस दिन के अधिपति उस वर्ष के राजा माने जाते हैं और चैत्र शुक्ल पक्ष के बाद जब भगवान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं अर्थात जिस दिन मेष संक्रांति होती है उस दिन के अधिपति को मंत्री का पद प्राप्त होता है। इस नियम के अनुसार इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे और मेष संक्रांति मंगलवार के दिन होने के कारण इस वर्ष के मंत्री अर्थात सेनापति मंगल देव होंगे। राजा देव गुरु बृहस्पति और मंत्रि मंगल देव के प्रभाव से यह वर्ष शासन प्रशासन और सत्ता में बैठे बड़े-बड़े राजनेताओं के लिए भयंकर चुनौती पैदा करेंगे। कई राजनेताओं को अपनी सत्ता गंवानी पड़ेगी। पूरे विश्व में भयानक मार काट की स्थिति बनी रहेगी। बड़े-बड़े देश का आपसी टकराव, हथियारों का अत्यधिक प्रयोग के कारण पूरी पृथ्वी पर प्रदूषण का माहौल रहेगा। लोगों में आक्रोश, लड़ने झगड़ने की प्रवृत्ति सहज ही देखने को मिलेगी। इस वर्ष आतंकवादी घटनाओं से देश का सांप्रदायिक ताना-बाना प्रभावित हो सकता है। कुछ देवी प्राकृतिक घटनाएं भी घटेंगी। जिससे धन-जन की हानि होगी। फिर भी आम आदमी के लिए यह वर्ष बहुत ही उन्नति कारक और शुभ फलदायक रहेगा।


1 मार्च रविवार को प्रदोष व्रत होगा।

आज पुष्य नक्षत्र होने के कारण रवि पुष्य सर्वार्थ सिद्धि योग है।

2 मार्च सोमवार को व्रत की पूर्णिमा होगी। आज होलिका दहन का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है। भद्रा काल की समाप्ति के बाद ही होलिका दहन करना चाहिए। इस वर्ष होलिका दहन के दिन सुबह 5:55 से पूरा दिन, पूरी रात प्रातः काल 5:28 तक भद्रा व्याप्त रहेगी। जिसके कारण होलिका दहन शेष रात्रि 5:28 के बाद ही करना उचित होगा। हालांकि कुछ विद्वानों का मत है की भद्रा का मुख का परित्याग कर भद्रा पूंछ में रात 12:50 के पहले होलिका दहन किया जा सकता है। अतः मध्य रात्रि के आसपास*ऊं होलिकायै नमः* इस मंत्र का उच्चारण करते हुए शास्त्रीय विधि से होलिका दहन किया जाएगा। किंतु यदि संभव हो तो शेष रात्रि 5:28 के बाद ही होलिका दहन करें।

ढुंण्ढा राक्षसी की पूजा करने के बाद होलिका दहन किया जाता है।

होलिका दहन के इसी मुहूर्त में कुछ वस्तुएं अवश्य डालनी चाहिए। जिससे हमारे जीवन से रोग, व्याधि, कष्ट, परेशानियां, शारीरिक, आर्थिक, मानसिक कष्ट, किसी भी तरह की तांत्रिक, मांत्रिक प्रयोग, नजर, टोने टोटके सब समाप्त हो जाएं।

सबसे पहले पीली सरसों का लेप बनाकर उसे अपने पूरे शरीर पर मालिश करके उसे उतार लेना चाहिए और इकट्ठा करके किसी कागज में अच्छे से बांधकर रख लें। फिर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद पांच लौंग, पांच इलायची, पीली सरसों, पांच कपूर के टुकड़े, काला तिल, सफेद तिल, जटा वाला नारियल, नवग्रह समिधा, गोबर के कंडे, नए अनाज की बालियां, पान के पत्ते, हवन सामग्री, गुग्गुल इन सब को एक साथ अपने सिर के ऊपर से घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में एंटी क्लॉक वाइज सात बार उतार लें। फिर उसे भी एक जगह इकट्ठा कर कर रख लें। फिर सप्तधान अर्थात् सात अनाज अपने सिर के ऊपर से उतारा करके रखें। इसके अलावा कोई भी मीठी चीज गुड़, बताशे अथवा कोई भी मिठाई यह सब एक जगह इकट्ठा करके इन सब को एक साथ ले जाकर होलिका दहन की इसी शुभ मुहूर्त में होलिका की जलती आग में *ऊं होलिकायै नमः* मंत्र बोलते हुए डाल दें।

एक गन्ना जो पत्ते सहित हो, उसे होलिका दहन की अग्नि में डालकर पत्ते को अच्छी तरह से जला दें और बचे हुए हिस्से को अर्थात् गन्ना को अपने घर लेकर आए और उसे अपने घर के दक्षिण पश्चिम के कोने में पूरे वर्ष खड़ा करके रख दें। इससे घर में धन संपत्ति की वृद्धि होती है। पुराने वर्ष के रखे हुए गन्ना को जल में प्रवाहित कर दें।

3 मार्च मंगलवार को स्नान दान की पूर्णिमा होगी।

आज भारतवर्ष में ग्रस्तोदित खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण का स्पर्श अथवा प्रारंभ भारत के किसी भी स्थान पर दिखाई नहीं देगा। ग्रहण की खग्रास स्थिति की समाप्ति सुदूर पूर्वी भारत के कुछ स्थानों में दिखाई देंगे तथा देश के बाकी सभी स्थानों में खंड चंद्र ग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा।

भारतीय समय के अनुसार शाम 6:00 बजे ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण का मोक्ष शाम 6:48 पर हो जाएगा। यह चंद्र ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि पर लगेगा। अतः सिंह राशि वालों को चंद्र ग्रहण का दर्शन नहीं करना चाहिए। इस चंद्र ग्रहण का सबसे अधिक दुष्प्रभाव मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, धनु, मकर और कुंभ राशियों पर पड़ेगा। जबकि मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण शुभ फल प्रदान करने वाला होगा। सर्वाधिक कष्ट मकर राशि वालों के लिए देखा जा रहा है। अतः सिंह और मकर राशि वालों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। पूजा पाठ, जप,ताप करना आवश्यक होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। सूतक काल से ही मंदिर में प्रवेश करना, मूर्ति को स्पर्श करना, भोजन करना, मिथुन क्रिया, यात्रा इत्यादि वर्जित हो जाता है। बालक, वृद्ध, रोगी के लिए अति आवश्यक स्थिति में हल्का भोजन करने की छूट है। स्वस्थ व्यक्ति को ग्रहण के सूतक काल से लेकर ग्रहण के मोक्ष तक भोजन नहीं करना चाहिए। घर के सभी पके हुए अनाज, भोजन सामग्री जैसे दूध, दही, घी इत्यादि में कुश का टुकड़ा रख देना चाहिए। ग्रहण के मोक्ष के बाद पीने का पानी बदलकर ताजा पानी ले लेना चाहिए। गर्भवती महिलाएं अपने पेट पर गाय के गोबर का पतला लेप लगा लें। अथवा अपने शरीर के माप के बराबर का कोई भी ठोस चीज किसी कोने में खड़ा करके रख दें। ग्रहण की अवधि में श्राद्ध, दान, जप, मंत्र सिद्धि इत्यादि करना श्रेष्ठ माना जाता है। सूतक के नियम के अनुसार भारत वर्ष में चंद्र ग्रहण का सूतक 3 मार्च 2026 मंगलवार को सुबह 9:00 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। शाम 6:48 के बाद ग्रहण का मोक्ष हो जाएगा। उसके पश्चात स्नान दान करके भोजन ग्रहण किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि की वृद्धि और चंद्र ग्रहण के प्रभाव के कारण आज होली का त्यौहार नहीं मनाया जाएगा।

चंद्र ग्रहण के मोक्ष के उपरांत काशी में चतुर्षष्ठी देवी अर्थात चौसट्ठी देवी की यात्रा दर्शन पूजा एवं काशी की अपनी परंपरा के अनुसार रंग गुलाल चढ़ाया जाएगा।

4 मार्च बुधवार को इष्टि है। आज के दिन अपने घर के मंदिर में रखे हुए देवी देवताओं की प्रतिमाओं को भोजन कराया जाता है। भोग लगाया जाता है। आज पूरे विश्व में होलीकोत्सव, रंगोत्सव अर्थात होली का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसका एक नाम बसंत उत्सव भी है। होलिका दहन की भस्म को मस्तक पर स्पर्श कर कर आने वाले संवत्सर की कुशलता की मंगल कामना की जाएगी और उसके बाद रंगों की होली मनाई जाएगी।



6 मार्च शुक्रवार को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा। प्राचीन मत के अनुसार आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जाएगी।



8 मार्च रविवार को रंग पंचमी है।

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। महिलाओं का समाज में योगदान के लिए आज के दिन पूरे विश्व में सभी जगह महिलाओं का विशेष सम्मान किया जाता है।



10 मार्च मंगलवार को काशी की प्राचीन परंपरा के अनुसार काशी का लौकिक पर्व वृद्धि अंगारक अर्थात बुढ़वा मंगल मनाया जाएगा। काशी का यह सांस्कृतिक पर्व है।



11 मार्च बुधवार को श्री शीतला अष्टमी का व्रत होगा। इसमें बासी पकवान प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है।



15 मार्च रविवार को पाप मोचनी एकादशी का व्रत गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए सर्वमान्य होगा। आज मीन संक्रांति है।



16 मार्च सोमवार को सोम प्रदोष व्रत होगा।



17 मार्च मंगलवार को मासिक शिवरात्रि व्रत होगा आज वारूणी पर्व योग भी है।



18 मार्च बुधवार को स्नान दान श्राद्ध की अमावस्या होगी।



19 मार्च गुरुवार को चंद्र नव संवत्सर श्री विक्रम संवत 2083 का आरंभ होगा। आज से वसंत नवरात्र प्रारंभ होगा। मां जगदंबा के प्रथम स्वरूप में आज माता शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। आज सुबह 6:52 तक अमावस्या तिथि रहेगी।6:53 सुबह से लेकर अगले दिन सुबह 4:52 तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। ऐसी स्थिति में शास्त्रीय आदेश के अनुसार 19 मार्च गुरुवार से ही क्षयवती प्रतिपदा तिथि में नया संवत्सर 2083 वसंतिक नवरात्र आरंभ हो जाएगा। नवरात्र का कलश स्थापना प्रातः काल 6: 52 के बाद किसी भी समय किया जाएगा।

महाराष्ट्र प्रांत में इसे गुड़ी पाड़वा के नाम से जानते हैं।

आज इष्टि है। आज के दिन अपने घर के मंदिर में स्थापित देवी देवताओं के प्रतिमाओं को भोजन करने का प्रसाद चढ़ाने का विधान है।



21 मार्च शनिवार को मुस्लिम संप्रदाय का प्रसिद्ध त्योहार ईद उल फितर अर्थात ईद का त्यौहार मनाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के कैलेंडर के अनुसार हिजरी सन 1447 चल रहा है।



22 मार्च रविवार को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत होगा।



23 मार्च सोमवार को श्री पंचमी है। इसे लक्ष्मी पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। आज मत्स्य जयंती है। आज के ही दिन जगत के पालनहार श्री हरि भगवान महा विष्णु ने प्रलय के समय मानव बीज की रक्षा के लिए मछली का रूप धारण कर के सप्त ऋषियों को बचाया था।



24 मार्च मंगलवार को चैती छठ का व्रत होगा। इसे भी डाला छठ के मान विधान के अनुसार ही मनाया जाता है। रवि षष्ठी का यह व्रत बिहार और झारखंड में सबसे अधिक मनाया जाता है।



26 मार्च गुरुवार को महाष्टमी का व्रत होगा।आज सुबह 11.48 मिनट से नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।

अतः नवरात्रि से संबंधित हवन यज्ञ, कुमारी कन्याओं का भोजन आज भी करा‌या जा सकता है।



27 मार्च शुक्रवार को सुबह 10.06 मिनट तक नवमी तिथि रहेगी।हवन यज्ञ कुमारी कन्याओं का भोजन आज सुबह 10 बजे के पहले करा लेना चाहिए।

आज मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया जाएगा।



29 मार्च रविवार को कामदा एकादशी व्रत गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए सर्वमान्य होगा।



30 मार्च सोमवार को सोम प्रदोष व्रत होगा।



31 मार्च मंगलवार को श्री अनंग त्रयोदशी का व्रत होगा।

जैन समुदाय का सबसे प्रमुख पर्व श्री महावीर जयंती भी आज मनाई जाएगी।



विशेष टिप्पणी:

4 मार्च बुधवार की रात 3:49 पर भगवान सूर्य पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 14 मार्च शनिवार की रात 3:07 पर भगवान सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ खरमास प्रारंभ हो जाएगा। खरमास में सारे शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। विवाह, गृह प्रवेश इत्यादि मांगलिक कार्य स्थगित हो जाते हैं। 18 मार्च बुधवार के दिन 11:17 पर भगवान सूर्य उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 31 मार्च मंगलवार की रात 9:42 पर भगवान सूर्य रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। जल में पैदा होने वाली चीजों एवं सुगंधित द्रव्यों को क्षति पहुंचेगी। चौपायों, पशुओं, मूंग, उड़द, लहसुन, सेमल की रुई का मूल्य (बाजार भाव) तेज चलेगा।



ज्ञानवर्धक बातें:

*सच का ज्ञान ही वैराग्य है*



एक बार राजा भोज की पत्नी भोज को स्नान करा रही थी, दोनों आनन्द का अनुभव कर रहे थे . भोज बार बार अपनी पत्नी से आग्रह करते कि पानी और डालो इस पर उनकी पत्नी जोर जोर से हंसने लगी . राजा ने पूछा कि तुम क्यों हंस रही हो इस पर उसने कहा कि ये बताने की बात नहीं है . लेकिन राजा अङ गया कि तुम्हें बताना होगा।

तब उसने कहा कि ये बात तुम्हें मैं नहीं मेरी बहन बतायेगी. उल्लेखनीय है कि भोज की पत्नी उस गज्ञान को जानती थी, जिसमें पूर्वजन्म का ज्ञान होता है।उसकी बहन भी इस ज्ञान को जानती थी। पर क्योंकि इस ज्ञान का संसार के नातों से कोई सम्बन्ध नहीं होता। इसलिये कितना भी सगा हो उसे ये ज्ञान नहीं बताते . बताने पर ये ज्ञान नियम विरुद्ध हो जाने से चला जाता है।

राजा भोज अपनी भारी जिज्ञासा के चलते अपनी साली के घर पहुँचा। वहाँ उस वक्त कोई कार्यक्रम चल रहा था ।

अतः राजा बात न पूछ सका। फ़िर फ़ुरसत मिलते ही राजा ने वह प्रश्न अपनी साली से कर दिया। तब उसने कहा कि तुम्हारी बहन ने कहा है कि बार बार पानी डालने की बात पर हंसने का रहस्य मेरी बहन बतायेगी..तब राजा की साली ने कहा कि आज आधी रात को बच्चे को जन्म देते ही मेरी मृत्यु हो जायेगी। इसके अठारह साल बाद मेरे पुत्र जिसका आज जन्म होगा, उसकी पत्नी तुम्हें ये राज बतायेगी।



राजा ने बहुत हठ किया। परंतु इससे ज्यादा बताने से उसने इंकार कर दिया। ठीक वैसा ही हुआ। पुत्र को जन्म देकर भोज की साली मर गयी..राजा ने अठारह साल तक बेसब्री से इंतजार किया और फ़िर वो दिन आ ही गया जब उस पुत्र का विवाह हुआ। राजा उसी बात का इंतजार कर रहा था। जैसे ही उसे वधू से मिलने का मौका मिला, उसने कहा मैं अठारह साल से इस समय का इंतजार कर रहा हूँ....और भोज ने पूरीबात बता दी।

वधू ने कहा कि पहले तो आप ये बात न ही पूछो तो बेहतर है और अगर पूछते ही हो तो मेरे पति से कभी इसका जिक्र न करना..अन्यथा वो पति धर्म से विमुख हो जायेगा और इससे विधान में खलल पङेगा।राजा मान गया।

तब उस वधू ने कहा कि आज जो मेरा पति है, अठारह साल पहले इसे मैंने ही जन्म दिया था। तुम्हारी पत्नी इसलिये हंस रही थी कि इससे पहले के जन्म में जब तुम उसके पुत्र थे, वह तुम्हें बाल अवस्था में नहलाने के लिये पकङती थी तब तुम नहाने से बचने के लिये बार बार भागते थे और आज स्वयं तुम पानी डालने को कह रहे थे।इसलिये उस जन्म की बात याद कर वो हंस रही थी।उसने या मैंने उसी समय तुम्हें ये बात इसलिये नहीं बतायी कि वैसी अवस्था में तुम उसे पत्नी मानने के धर्म से विमुख हो सकते थे।यह बात सुनते ही राजा में गहरा वैराग्य जाग्रत हो गया।

यही प्रभु की लीला है।

इति शुभमस्तु!!

लेखक:रवि शेखर सिन्हा उर्फ आचार्य मनमोहन। ज्योतिष मार्तंड एवं जन्म कुंडली विशेषज्ञ।

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