गये समय की बातें हैं, जी रहे वर्तमान में,
इतिहास को संजो रहे हैं, हम वर्तमान में।हो गये हम भी बूढ़े, है प्रहर चौथा उम्र का,
सुना दें बातें पुरानी, बच्चों को वर्तमान में।
दादी ने हमको बताया, करांची तक व्यापार था,
घोड़े पर दादा चलते थे, रुतबा बरकरार था।
थी दुकडिया एक घर में, काम तिजोरी का करती,
राजाओं सा जीवन जीते, धन दौलत अम्बार था।
भले कहानी झूठी होती, पर उत्सुकता रहती थी,
एक था राजा एक रानी, कहानी दादी कहती थी।
कभी पढ़े थे बचपन में, वो किस्से आज भी याद हैं,
विक्रम और बेताल की बातें, जो किताबों में रहती थी।
बचपन को जीने की चाहत, हम पचपन में रखते हैं,
लुका छिपी गिट्टी पिट्ठू, ताँक झाँक उपवन में रखते हैं।
सुन्दर नार रूप सलोना, चितवन जिसकी मोहक हो,
मौन भले सब मुख से रहते, पर नयनन में रखते हैं।
अ कीर्ति वर्द्धन
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