आँधियों में दीप जलाने में, थोडा वक्त लगता है,
भंवर से निकल जाने में, थोडा वक्त लगता है।यह तो सच है फैली है देश में, आतंक की बेल,
आतंकियों को मिटाने में, थोडा वक्त लगता है।
बोये हैं बीज कुछ ने यहाँ, नफरत- अलगाव के,
नफरत की फसल कटने में, थोडा वक्त लगता है।
चलो निकालें खरपतवार देश से, धर्म जातिवाद की,
राष्ट्र शक्तिशाली, समृद्ध बने, थोड़ा वक्त लगता है।
फैला हो तम अवास्या का, गहन अंधेरा छाया हो,
तम के बीच राह तलाशने में, थोड़ा वक्त लगता है।
अपने बलबूते बढ़ने की ख्वाहिश, अपनों ने गिराया,
मुश्किलें राहें गिरकर उठने में, थोड़ा वक्त लगता है।
डॉ अ कीर्तिवर्धन
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