सरस्वती वंदना
✍️ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"शारदे शुभदा देवी
वीणापुस्तकधारिणी।
प्रज्ञां देहि दयामूर्ते
अविद्यां नाशयस्व मे॥
हंसवाहिनि जगन्मातः
श्वेताम्बर-विभूषिते।
वाक्शुद्धिं मे प्रयच्छ त्वं
सत्पथे नय सर्वदा॥
विद्या-बुद्धि-विवेकं च
भक्तिम् औचित्यमेव च।
प्रकाशय मनो मेऽद्य
तमसो मां विमोचय॥
नित्या नूतनबुद्धिस्त्वं
वागीशा वेदवन्दिता।
शरणागतवत्सले
मां पालय नमोऽस्तु ते॥
( मौलिक रचना )
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