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गणतंत्र दिवस 2026: भारत पर्व में बिहार की झांकी—“मखाना: लोकल से ग्लोबल तक”

गणतंत्र दिवस 2026: भारत पर्व में बिहार की झांकी:- “मखाना: लोकल से ग्लोबल तक”

26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह में रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों का प्रदर्शन लाल किले, नई दिल्ली में किया जाएगा। यह आयोजन 23 से 31 जनवरी तक चलेगा, जिसमें देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को झांकियों, हस्तशिल्प, खानपान और परंपराओं के माध्यम से आम जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। भारत पर्व “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना के साथ राज्यों की विशिष्ट पहचान, परंपरागत ज्ञान, आजीविका के स्रोत और आधुनिक विकास की यात्रा को जोड़ने का एक राष्ट्रीय मंच है।
बिहार की झांकी: मखाना—परंपरा, परिश्रम और प्रगति की कहानी
इस वर्ष भारत पर्व में बिहार की झांकी का विषय है- “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड”।
“पग पग पोखड़ि माछ मखान, सरस बोल मुस्की मुख पान…”
आचार्य सोमदेव (गौरी शंकर प्रसाद श्रीवास्तव) की इस कविता में मिथिला और मखाना की पूरी व्याख्या है। बिहार का सफेद सोना यानी मखाना आज मिथिलांचल के पोखर से निकलकर 'सुपरफूड' पहचान के साथ दुनिया की थाली में परोसा जा रहा है। यह लोकल हुनर का ग्लोबल चेहरा है।
मखाना, जिसे फॉक्स नट या कमल बीज भी कहा जाता है, मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर आज वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुका है। भारत दुनिया की कुल मखाना आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा देता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85–90 प्रतिशत है। मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में GI टैग भी प्राप्त हुआ है, जिसने इसे वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान दी है ।
झांकी की दृश्य संरचना
बिहार की झांकी दो भागों में मखाना की पूरी यात्रा को दर्शाती है:
ट्रैक्टर खंड में कमल के पत्तों के बीच उभरा सफेद “लावा मखाना”, आगे GI टैग का प्रतीक और किनारों पर मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर।
ट्रेलर खंड में मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और क्वालिटी चेक की पूरी प्रक्रिया।
एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला, दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से फोड़ता पुरुष—यह दृश्य पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
यह झांकी यह संदेश देती है कि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि यह विरासत, श्रम, महिला भागीदारी और उद्यमिता का संगम है, जो बिहार को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।
मखाना और केंद्रीय बजट 2025–26: बिहार के लिए नया अवसर
केंद्रीय बजट 2025–26 में बिहार के मखाना किसानों के लिए एक ऐतिहासिक पहल की गई है। केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की है और इस योजना के लिए लगभग ₹475 करोड़ के विकास पैकेज को स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्द्धन और विपणन को सशक्त बनाते हुए किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
मखाना: पोषण का खजाना
मखाना न केवल आर्थिक बल्कि पोषण के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह:
प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है,
मधुमेह और वजन नियंत्रण में सहायक है,
हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है,
कम कैलोरी और कम वसा वाला पौध-आधारित सुपरफूड है।
सदियों से मखाना भारतीय धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहा है और आज यह आधुनिक स्वास्थ्य-जागरूक दुनिया में “सुपरफूड” के रूप में पहचाना जा रहा है।
बिहार से विश्व तक: झांकी का संदेश
भारत पर्व में बिहार की यह झांकी केवल मखाना की कहानी नहीं सुनाती, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे:
पारंपरिक ज्ञान आधुनिक तकनीक से जुड़ सकता है,
स्थानीय आजीविका वैश्विक बाजार तक पहुँच सकती है,
किसान, महिला श्रमिक और छोटे उद्यमी विकास की मुख्य धारा बन सकते हैं।
मखाना बोर्ड की स्थापना, बढ़ता निर्यात, GI टैग और भारत पर्व में झांकी का प्रदर्शन—ये सभी मिलकर यह संदेश देते हैं कि बिहार का मखाना अब केवल “तालाब का उत्पाद” नहीं, बल्कि “भारत की वैश्विक पहचान” बनने की ओर बढ़ रहा है।भारत पर्व 2026 में बिहार की झांकी, देश और दुनिया को यह दिखाएगी कि कैसे परंपरा, परिश्रम और प्रगति मिलकर “मखाना” को लोकल से ग्लोबल तक पहुँचा रहे हैं।
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