दीपोत्सव
उत्सव को उत्सव बनाकर जियो,उत्सव को ख़ुशियाँ बनाकर जियो।
उत्सव ही प्रेरणा जीवन जीने की,
उत्सव को प्राण तत्व बनाकर जियो।
खुशियों को बाँटिए, तम मिटाइए,
हर गली कूँचे में, दीपक जलाईये।
भूखा न रहने पाये, कोई पड़ोस में,
सम्मान से भोजन, भंडारा लगाईये।
है पर्व रोशनी का, अन्धकार मिटाने का,
शिक्षा दीप जलाने, अज्ञान मिटाने का।
जाति धर्म क्षेत्रवाद, नहीं शास्त्र में लिखा,
मानवता का पालन, भेदभाव मिटाने का।
डॉ अ कीर्ति वर्द्धन
53 महालक्ष्मी एनक्लेव मुज़फ़्फ़रनगर उ प्र भारत
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