' तब्दीली'
मीरा जैन,उज्जैन(मध्यप्रदेश)
'अरे भोला! इतनी सुंदर राखी की दुकान सजा रखी है लेकिन चेहरे पर इतनी मायूसी ?'
' क्या करूं दीदी ! हर वर्ष तो मेरी राखियां हाथो हाथ बिक जाती है लेकिन इस बार सुंदर और सस्ती होने के बावजूद भी एक भी राखी नहीं बिकी ग्राहक आते हैं देखते हैं चले जाते हैं पता नहीं क्यों , मेरा क्या होगा दीदी ?'
कहते कहते भोला का गला रुंध गया .
मानवी ने भी एक राखी उठाकर देखी और देखते बोली -
' भोला ! तुम निरक्षर हो तुम्हें पता नहीं इन सब राखियों पर मेड इन चाइना लिखा हुआ है शायद शहर में नहीं बिक रही होगीं इसीलिए व्यापारी ने तुम्हें सस्ते में दे दी '
' ओ हो !' के साथ ही भोला की आंखों से आंसू टपक पड़े मानवी ने उसे ढंढास बंधाते हुए कहा -
' अब रोने से क्या होगा ?'
'दीदी! ग्राहकों की देशभक्ति देख मेरी आंखों में आंसू आ गए मैं बंद कर देता हूं जो घाटा होगा सह लूंगा पर ये राखियां नहीं बेचूंगा '
' भोला ! इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है वास्तव में तुम सबसे बड़े देशप्रेमी हो तुम्हें पैसों की आवश्यकता भी है लेकिन तुमने इतना बड़ा निर्णय ले लिया मगर परिवार की देख रेख भी तुम्हारी जिम्मेदारी है मेरी एक सलाह मानों ---- ध्यान रखना भविष्य में ऐसी गलती दुबारा ना हो '
मानवी की सलाह पर अमल करने के पश्चात अगले दो दिनों में भोला कि सारी राखियां बिक गई , सलाह बस इतनी सी थी -
' तिरंगे झंडे वाले रंगों के रेशमी धागे लेकर मेड इन चाइना पर चिपका दो '
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