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"देहरी का महाप्रस्थान"
डॉक्टर्स, सी.ए.-समाज के मूल स्तंभ
हे गंगा मैया, मेरे पापा का रखना ध्यान
प्रेम का बीज
मित्रता
बरसात की भविष्यवाणी
स्त्री मोहताज नहीं गुलाब की, वह बागवान है इस कायनात की
"विडंबना : साधुता का दंड"
शांति-दूत श्रीकृष्ण
इंसान में साक्षात भगवान
बरसात
खुदको दौहराता है
जानती है झोपडी कि बरसात आयेगी,
"भीतर का स्वर"
पितृ छाया से वंचित हुई आज दुनिया मेरी
गढ़ चित्तौड़ सिखाता है
सदियों से करते रहे, हम ऐसे छलछंद।।
बदला समाज
रिश्तों की पकड़
"साक्षी के उस पार"